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श्री सिद्धिविनायक मंदिर1 min read

श्री सिद्धिविनायक मंदिर

श्री सिद्धिविनायक मंदिर भगवान श्री गणेश को समर्पित है। कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से पूर्व भगवान श्री गणेश की पूजा अनिवार्य रूप से की जाती है। यह रिवाज भी है कि सभी देवी-देवताओं से पहले श्री गणेश की पूजा की जाती है। जिस को हम ‘श्रीगणेश’ के नाम से भी जानते हैं। मुंबई के प्रभादेवी में स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर देश में स्थित सब से पूजनीय मंदिरों में से एक है। भक्त जब भी किसी नए काम को प्रारम्भ करता है तो इस मंदिर के दर्शन जरूर करता है। हर साल श्री सिद्धिविनायक मंदिर में लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आ कर भगवान गणेश की पूजा करते हैं। श्री सिद्धिविनायक मंदिर की अपनी एक अलग ही पहचान हैं। यहाँ देश-विदेश से लोग श्रीगणेश भगवान के एक दर्शन पाने के लिये आते हैं। इस मंदिर में भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापित कर रखी हैं। इस मंदिर के नाम के पीछे भी एक कथा है, इसका नाम सिद्दिविनायक इसलिये पड़ा क्योंकि भगवान गणेश के सूड दाई ओर मुड़ी होती हैं तथा सिद्धि पीठ से जुड़ी होती हैं।श्री गणेश के शरीर से ही सिद्दिविनायक नाम पड़ा। इस मंदिर के प्रति लोगो में अत्यंत अटूट विशवास है।

यह मंदिर आतंकवादियों के हेड लिस्ट में हमेशा से ही रहता हैं। यही कारण है की केंद्र सरकार और राज्य सरकार इस मंदिर को काफी सुरक्षा देती हैं। आज भी अगर हम सिद्दिविनायक में जाते है तो हमें मुंबई पुलिस के जवान और भारतीय सेना के जवान दिखते हैं, जिन्होंने इस मंदिर को चारो ओर से घेर रखा हैं। यहाँ काफी मशहूर हस्तियों आती हैं इस मंदिर में कोई भी अप्रिय घटना ना हो इसलिये इतनी ज्यादा सुरक्षा दी जाती हैं।

श्री सिद्धिविनायक मंदिर का इतिहास :

सिद्दिविनायक मंदिर के संबंध में कुछ इतिहासकार बताते हैं की इस मंदिर की स्थापना सन 1692 में हुई थीं तथा सरकारी खबर से इसका निर्माण 1801 में हुआ था। शुरू में यह मंदिर छोटा था लेकिन बाद में इसका कई बार निर्माण हो चुका हैं। जिस कारण अब मंदिर काफी बड़ा हैं. इस मंदिर की इमारत 5 मंजिला हैं।

इस मंदिर में प्रवचन के लिये हाल है।मंदिर के दूसरी मंजिल पर अस्पताल है जहाँ पर रोगियों का निशुल्क उपचार किया जाता हैं. इस मंदिर में लिफ्ट लगी हैं. इस मंदिर में एक अलग से एक लिफ्ट है जहाँ पर पुजारी लोग गणेश जी के लिये पूजा की सामग्री, प्रसाद तथा लड्डू आदि लाते है।

श्री सिद्धिविनायक मंदिर में स्थित गर्भगृह :

इस मंदिर में एक गर्भगृह भी हैं, गर्भगृह को इस तरह बनाया गया है कि भक्तगण सभा से ही दर्शन ले सकते हैं। गर्भगृह 10 फीट चौड़ा और 13 फीट ऊँचा हैं। जिसमे भगवान गणपति रहते हैं। गर्भगृह में तीन दरवाजे है और तीनो ही दरवाजो पर आकृतिया लगी हैं। यहाँ भक्तो की काफी भीड़ होती है यहाँ हर साल गणपति पूजा महोत्सव आयोजन होता हैं।

श्री सिद्धिविनायक मंदिर में स्थित चर्तुभुर्जी विग्रह :

इस मंदिर की एक अलग विशेषता हैं जो की चतुभुर्जी विग्रह गणेश जी के उपरी दाहिने हाथ में कमल के फूल और बाएँ हाथ में अंकुश हैं तथा नीचे हाथ में मोतियों की माला और बाएँ हाथ में लड्डूओं से भरा कटोरा हैं। गणेश जी की दोनों पत्नियाँ रिद्धि और सिद्धि मौजूद हैं जो की धन, सफलता और मनोकामनाओं को पूरा करने का एक प्रतीक हैं। सर पर पिता शिव के समान एक तीसरा नेत्र और गले में सांप का हार लिपटा हैं, यह एक काले शिलाखंड से बना होता हैं जो ढाई फीट ऊँचा और दो फिट चौड़ा होता है।

अभी तक आपने अगर इस मंदिर के दर्शन नहीं किये है तो एक बार जरुर कर ले। कहा जाता है की यहाँ मांगी गई हर मनोकामना  पूर्ण हो जाती है। तो एक बार इस मंदिर के दर्शन अवश्य करिए।

 

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