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श्री कृष्ण द्वारा कालिया नाग मर्दन1 min read

 

श्री-कृष्ण-कालिया-नाग-मर्दन

श्री कृष्ण की कालिया नाग मर्दन लीला;

भगवान विष्णु के द्वापर युग में लिए गए अवतार का नाम का श्री कृष्ण है। ग्रंथों में श्री कृष्ण द्वारा कालिया नाग मर्दन की लीला का भी वर्णन है, जो श्री कृष्ण की बाल लीलाओं में से एक है।

 

कालिया नाग वृंदावन क्यों आया था?

कद्रू का पुत्र और पन्नग जाती का राजा था। कालिया नाग मूल रूप से रमण दिव्प में रहता था। वह प्रतिदिन गरुड़ को उनका भोजन भेज दिया करता था ताकि गरुड़ उन्हें परेशान न करे। किन्तु एक दिन भूके होने के वहज से कालिया नाग ने गरुड़ का भोजन स्वयं ही खा लिया। इसी कारणवश कालिया नाग की गरुड़ से शत्रुता हो गयी और गरुड़ ने कालिया नाग पर आक्रमण कर दिया था।

कालिया नाग यह जनता था की महर्षि सौभरि के श्राप की वजह से गरुड़ वृन्दावन में यमुना के कुंड में प्रवेश नहीं कर सकता था। हुआ यह था की, एक दीन महर्षि सौभरि के मना करने पर भी गरुड़ ने यमुना के इस कुंड में से अभीष्ट मछली को बलपूर्वक अपना भोजन बना लिया था। इस से क्रोधित हो कर महर्षि सौभरि ने गरुड़ को यह श्राप दे दिया की यदि भविष्य में गरुड़ ने कभी भी इस कुंड में प्रवेश किया तो उसी समय गरुड़ की मृत्यु हो जाएगी। चूँकि कालिया नाग इस श्राप के विषय में जनता ता इसलिए उस ने वृंदावन के इस यमुना के कुंड में छिपना उचित समझा और इसी कुंड में रहने चला गया था।

 

वृंदावन में क्या हुआ?

जब कालिया नाग यमुना के कुंड में रहने लगा था तो उसके विष से सारा परिवश अतियंत विषैला हो गया था। आस पास के सभी पेड़ पौधे सूखे पड़ गए थे। यहां तक की पक्षी जो कुंड के समीप क्षेत्र में उड़ते थे वह भी मर रहे थे। कुंड का विषैला जल  पिने से ग्वाले और उनके जानवर भी मरने लगे थे। इस सभी वृंदावन वासी परेशान व भयभीत थे।

 

कालिया मर्दन से जुडी २ (2) कहानियां;

  1. कई कहानियों में यह भी कहा गया है की, जब ऋषि दुर्वासा वृंदावन आये थे तब राधा ने उनकी सेवा पूजा की थी। ऋषि दुर्वासा के जाने के बाद जब राधा यमुना किनारे घूम रही थी तो विशालकाय कालिया नाग को देख कर घबरा गयी और वापस जा कर सभी वृंदावन वासियों को उसके बारे में बताया। यह सुन कर श्री कृष्ण ने कालिया नाग को सबक सीखने के लिए कुंड में चले गए थे।
  2. एक दिन जब श्री कृष्ण अपने सखाओं के साथ यमुना के किनारे खेल रहे थे तो उनकी गेंद कुंड में चली गयी। कालिया नाग के भय से कोई भी गेंद लेन के लिए कुंड में नहीं जाना चाहता था। तब श्री कृष्ण कुंड के पास कदम के पेड़ पर चढ़ गए और कुंड में छलांग लगा दी। जब श्री कृष्ण कुंड में अंदर पहुंचे तो कालिया नाग क्रोध में विष उगलने लगा और अपने सभी फन फैला लिए।

श्री-कृष्ण-और-उनके-सखाश्री कृष्ण और उनके सखा

कालिया नाग मर्दन;

कालिया नाग ने श्री कृष्ण को अपनी पूंछ से जकड लिया था। तब श्री कृष्ण ने अपना शरीर इतना बड़ा कर लिया की कालिया नाग को उन्हें मुक्त करना पड़ा। कुंड के तट पर मुजूद माँ यशोदा, नन्द बाबा, राधा, बलराम और बाकि सभी वृन्दावन वासी चिंतित होने लगे थे। सभी को परेशान देख कर श्री कृष्ण ने कालिया नाग को अपने वश में कर लिया और उसके फन पर चढ़ गए तथा कुंड के पानी से ऊपर आ गए।

श्री कृष्ण ने कालिया नाग के फन पर नृत्य करने लगे। कलिता नाग पर श्री कृष्ण का भार पुरे ब्रह्माण्ड के बराबर था। कुछ ही समय में कालिया नाग के फनो से रक्त निकलने लगा। तब कालिया नाग की पत्नियों ने हाथ जोड़ कर श्री कृष्ण से उनके पति के प्राण बक्शने के लिए विनती की।चुकी वह श्री कृष्ण की भक्त थीं तो श्री कृष्ण ने उनकी विनती क़बूल कर ली और कालिया नाग के प्राण बक्श दिए।

श्री कृष्ण ने कालिया नाग को रमण दिव्प वापस लोट जाने को कहा और यह आश्वासन दिया की अब गरुड़ उसे परेशान नहीं करेंगे क्यूंकि उसके फन पर श्री कृष्ण के चरणों के चिन्ह है।

श्री-कृष्ण

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वृन्दावन यह स्थान आज कालिया घाट/कालीदह के नाम से जानी जाती है।

 

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