Home / प्रसिद्ध कथाएँ / तेनालीराम की कथाएँ / विजयनगर में प्रवेश1 min read

विजयनगर में प्रवेश1 min read

विजयनगर में प्रवेश

कई साल पहले भारत के दक्षिण भाग में विजयनगर नाम का एक राज्य था। उस राज्य में राजा कृष्णदेव राय राज करते थे। राजा कृष्णदेव राय के दरबार में एक तेनालीराम नाम का रत्न था। तेनालीराम अपने वाक्चातुर्य और बुद्धिमत्ता के कारण सिर्फ विजयनगर में ही नहीं बल्कि पुरे देश विदेश में प्रसिद्ध था। उनके गाँव का नाम तेनाली और उनका नाम रामन होने के कारण वह विजयनगर में तेनालीराम के नाम से जाने जाते थे।

तेनालीराम राजा कृष्णदेव राय की ख्याति सुन कर तेनाली गाँव से विजयनगर आये। राजा कृष्णदेव राय के राजपुरोहित और उनके चेले को देख कर तेनालीराम उनसे मिले। तेनालीराम राज पुरोहितजी से बोले नमस्कार राजपुरोहित जी मैं तेनाली से आया हूँ, मेरा नाम रामन है। मैं राजा कृष्णदेव राय जी से मिलना चाहता हूँ। क्या आप मुझे उनके दरबार में प्रवेश दिला सकेंगे?

विजयनगर

इसपर राजपुरोहित जी बोले, मैंने जीवन के पच्चीस साल शिक्षा प्राप्त की तपस्या की तब जा कर मुझे महाराज के दरबार में उनकी की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है। मेरे जैसे साधना करने वाले अनेक लोग हैं पर उन्हें आज तक ऐसा अवसर प्राप्त नहीं हुआ है। पर तुम कौन हो जो तुम्हें महाराज ऐसा अवसर दें? तुम्हारा नाम तो मैंने कभी सुना नहीं है।

तेनाली बोले, मैं जानता हूँ मैं छोटा मुँह बड़ी बात करता हूँ, पर आप इतने बड़े विद्वान, वो भी महाराज के मन पसंद! मैंने सोचा आपसे ही पूछता हूँ। आपके अलावा मुझे ही नहीं बल्कि किसी को भी दरबार में प्रवेश करना कैसे संभव है। आप अगर मन में ठान लें तो कुछ भी संभव है। तेनाली की बातें सुन कर राजपुरोहित जी का चेला खुश हो गया और बोला, राजपुरोहित जी इसको दरबार में बुला लें? राजपुरोहित जी बोले, ठीक है! तुम्हारा फैसला राज दरबार में ही करेंगे। यह कह कर वे वहां से चले गए।

अगली सुबह तेनालीराम राज दरबार की ओर चल दिया उसको आता देख राजपुरोहित जी बोले, अरे! यह तो यहाँ आ धमका। राजपुरोहित के चेले ने सेवक को बुला कर कहा, वह जो पतला-दुबला आदमी आ रहा है, उसको दरबार के अंदर मत आने देना। हमें लगता है वह चोर है।

सेवक आज्ञा अनुसार राज महल के प्रवेश द्वार में गया और तेनाली से कहने लगा, तुम यहाँ से निकल जाओ! तेनाली ने कहा मुझे राज पुरोहित ने बुलाया है। सेवक बोले मुझे राजपुरोहित जी ने ही कहा है मैं तुम्हें अंदर न आने दूँ। निकल जाओ यहाँ से! तेनाली वहां से चला गया।

कुछ दिनों तक तेनालीराम विजयनगर में घूमता रहा। एक दिन उसे राजपुरोहित जी और उनके चेले नदी में स्नान करते हुए दिखे। तेनाली ने मन ही मन सोचा अरे वाह! क्या सही अवसर मिला है और वह उन दोनों के सारे कपड़े ले कर पेड़ में चढ़ गया। राजपुरोहित जी के चेले ने देखा की कपड़े वह नहीं हैं तो वह उनसे बोला, राजपुरोहित जी कपड़े कहा हैं?

तब तेनाली बोला कपड़े मेरे पास हैं। राजपुरोहित जी बोले, हमारे कपड़े वापस करो। तेनालीराम बोला, कपड़े मैं वापस कर दूंगा पर एक शर्त पर। कैसी शर्त? राजपुरोहित जी बोले। तेनालीराम बोला आपको मुझे अपने कंधे पर बैठा कर राजमहल तक ले जाना होगा। राजपुरोहित जी ने शर्त मंज़ूर कर ली। उनके पास कोई और रास्ता भी न था।

राजपुरोहित जी तेनालीराम को कंधे पर बैठा कर दरबार की ओर चल दिए। रास्ते में उनको देख लोग हंस रहे थे। जब वे महल के प्रवेश द्वार पर पहुंचने वाले थे तभी राजा कृष्णदेव राय ने उन्हें देखा और सोचा ये तो हमारे राजपुरोहित जी हैं। और ये कौन है जो उनका मजाक बनवा रहा है? उन्होंने तुरंत सिपाही को बुलाया, सिपाही को देख वो बोले तुम कौन हो? नए लग रहे हो। सिपाही बोला, मैं सेनापति जी का पुत्र हुँ। राजा बोले ठीक है। नीचे जाओ और राजपुरोहित जी के कंधे पर जो बैठा हुआ है, उसकी अच्छी तरह पिटाई करो और राजपुरोहित जी को सम्मान के साथ अंदर लेकर आओ।

उधर राजा को गुस्से में अपने सिपाही से कुछ बात करता देख तेनालीराम राजपुरोहित जी के कंधे से उतर गया और बोला राजपुरोहित जी मुझे माफ़ कर दीजिये! मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी और इस भूल को सुधारने के लिए मैं आपको अपने कंधे पर बैठा कर अंदर ले जाना चाहता हुँ। राजपुरोहित जी तेनालीराम के कंधे पर बैठ गए और तेनालीराम चल दिया सिपाही नया था। उसको नहीं पता था राजपुरोहित जी कैसे दिखते हैं। उसने तेनालीराम को राजपुरोहीत समझ लिया और तेनालीराम के कंधे से उतार कर राजपुरोहित जी की बहुत पिटाई की और तेनालीराम को अंदर ले गया।

राजा तेनाली को देख कर बोले तुम कौन हो और राजपुरोहित जी कहाँ हैं? तेनालीराम ने कहा, महाराज मैं तेनाली से आया हूँ, मेरा नाम रामन है और सारी बात बताई और कहा, मैंने अबतक जो कुछ भी कहा है वह सत्य है, अब आप मुझे जो भी सजा देंगे वह मुझे मंज़ूर है। तेनालीराम की बुद्धि विनम्रता और निर्भयता को देख राजा बहुत खुश हुए और बोले तुम बहुत चतुर हो हमें तुम्हारे जैसे व्यक्ति की ज़रूरत है, अब तुम यहीं रहना। तेनालीराम बोला में धन्य हुआ मेरा सपना साकार हो गया।

Top 5 advantages of using herbal tablets

For Similar Blogs Visit AYURVEDA GYAN

About Chyanika Pandey

Check Also

श्री-कृष्ण-की-मृत्यु

श्री कृष्ण की मृत्यु (भाग-1)

श्री कृष्ण की मृत्यु जो व्यक्ति इस धरती पर जन्म लेता है उसकी मृत्यु निश्चित …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *