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रामायण; बाल कांड का सार1 min read

हंदु धर्म में सबसे पवित्र ग्रंथों में से एक है श्री राम के जीवन काल पर आधारित रामायण। ऋषि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के बाल कांड मैं श्री हरी विष्णु के अवतार, श्री राम के बाल कल का विवरण है। ऋषि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में कुल सात कांड है। यह सात कांड कुछ इस प्रकार है बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, सुन्दर कांड, लंका कांड और उत्तर कांड।

 

बाल कांड;

रघुकुल के राजा दशरथ की तीन रानियाँ थी; कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी। राजा दशरथ की पुत्र कामना प्रून नहीं हो पा रही थी। तब उनके गुरु वशिष्ट ने यह उपाय बताया की वह ऋषि श्रृंगी की सहायता से एक पुत्रकामेष्टि यज्ञ का आयोजन करने। राजा दशरथ ने यज्ञ का आयोजन किया और ऋषि श्रृंगी ने यज्ञ को सफलता पूर्वक पूर्ण किया। यज्ञ के फल स्वरुप राजा दशरथ की तीनो पत्नियों को पुत्र प्राप्ति होती है। कौशल्या श्री राम को जन्म देती है, सुमित्रा लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म देती है और कैकेयी ने भरत को जन्म दिया था।

श्री राम समेत उनके भाई लक्ष्मण, शत्रुघ्न और भरत ने अपने कुलगुरु ऋषि वशिष्ट से गुरुकुल में ही शिक्षा प्राप्त की थी। अर्थात ऋषि वशिष्ट चारों भाइयों के गुरु थे। ऋषि वशिष्ट के नेतृत्व में वह वेदों और शास्त्रों के ज्ञान में निपुण हो गए ताकि वह अपने राज्य के रक्षक बन सके। चरों भाइयों को ऊच कोटि के नैतिक मूल्य सिखाए गए।

जब श्री राम १६ (16) वर्ष के थे तब एक दिन ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ के पास यह अनुरोध ले कर आते है की उनके द्वारा किये जाने वाले यज्ञ में रूकावट डालने वाले राक्षसों से यज्ञ को बचने के लिए श्री राम उनकी साहियता करें। श्री राम की आयु कम होने के कारन राजा दशरथ विश्वामित्र को मना कर देते है। परन्तु जब ऋषि वशिष्ट राजा दशरथ को समझते है तो राजा दशरथ ऋषि विश्वामित्र का अनुरोध मान लेते है और श्री राम और लक्ष्मण को साथ ले जाने अनुमति दे देते है।

ऋषि विश्वामित्र श्री राम और लक्ष्मण को शास्त्रों का ज्ञान भी देते हैं। उन्होंने श्री राम और लक्षमण को रहस्यपूर्ण सूत्र या मन्त्र भी सिखाए जिस से उनकी थकन, भूक और प्यास दूर हो जाएगी। ऋषि विश्वामित्र से उन्हें रहस्मय और अलौकिक शास्त्र भी प्रदान किये।

अपनी यात्रा के समय श्री राम ने राक्षसी तड़का का भी वध किया।

जब ऋषि विश्वामित्र अपना यज्ञ प्रारम्भ करते है तो राक्षस मारीच और सुबाहु यज्ञ में विघ्न डालने आते है। तब श्री राम मारीच और और सुबाहु दोनों को सफलता पूर्वक परास्त करते है और ऋषि विश्वामित्र अपना यज्ञ भी पूर्ण कर पते है।

यज्ञ के पूर्ण होने के उपरान्त ऋषि विश्वामित्र श्री राम और लक्षमण सहित मिथिला की ओर प्रस्थान करते है। ऋषि विश्वामित्र वहां शिव के धनुष को देखने के लिए जाते है जो सदियों से राजा जनक के यहां पूजा जा रहा था।

उनकी मिथिला की ओर यात्रा में श्री राम अहिल्या को भी श्राप से मुक्त करते है। श्री राम के चरण जैसी ही पत्थर की अहिल्या को स्पर्श करते है वह अपने वास्तविक रूप में आ जाती है ओर अपने श्राप से मुक्त हो जाती है।

बाल-कांड-श्री-राम-सीता-विवाह

 

श्री राम और सीता का विवाह:

ऋषि विश्वामित्र श्री राम और लक्ष्मण के साथ मिथिला पहुंचते है। वहाँ राजा जनक ने सीता का स्वयंवर आयोजित किया होता है। स्वयंवर की शर्त यह थी की जो भी शिव धनुष को उठा लेगा सीता का विवाह उसी युवक से होगा। वहाँ मौजूद सभी युवक एक एक कर शिव धनुष को उठाने की कोशिश करते है परन्तु कोई भी शिव धनुष को उठा नहीं पाता। ऋषि विश्वामित्र के सुझाव देने पर श्री राम धनुष को उठाने जाते है और बड़ी ही सरलता से शिव धनुष को उठा भी लेते है। जब वह धनुष को तान रहर होते है तन वह शिव धनुष टूट जाता है। अतः श्री राम का विवाह सीता से करवा दिया जाता है। साथ ही लक्ष्मण का विवाह उर्मिला से, भरत का विवाह मांडवी से और शत्रुघ्न से विवाह श्रुतकीर्ति से करवा दिया जाता है।

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