Home / माँ दुर्गा जी के 9 रूप / माता शैलपुत्री / माँ शैलपुत्री की कथा1 min read

माँ शैलपुत्री की कथा1 min read

माँ-शैलपुत्री-की-कथा

माँ शैलपुत्री की कथा

माँ दुर्गा क ९ रूप होते है और देवी माँ के पहले स्वरुप को शैलपुत्री क नाम से जाना जाता हैं, यह नवदुर्गा में प्रथम दुर्गा हैं और नवरात्रों का पहला दिन हिन्दू कैलेंडर के नववर्ष के रूप में जाना जाता हैं। माँ शैलपुत्री हिमालय की पुत्री पारवती हे (हिमालय को शैल कहते हैं , शैल मतलब पत्थर) और शैल की पुत्री होने के कारण माँ का नाम शैलपुत्री पड़ा। नवरात्रा के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की आराधना होती है और जिसका श्लोक हैं –

वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् |

वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ||

माँ शैलपुत्री के डैने हाथ में त्रिशूल और बाइये हाथ में कमल सुशोभित है। पिछले जनम में माँ प्रजापति दक्ष की बेटी थी तब इनका नाम सती था और इनका इनका विवाह शंकर जी से हुआ था।

कथा

एक बार की बात हे सती क पिता दक्ष प्रजापति हुए, ब्रह्मा जी ने उन्हें सब तरीके से योग्य माना और दक्षया को प्रजापतियो का नायक बना दिया, जब दश्य को इतना बड़ा पद मिला तो उसमें अभिमान आ गया। एक बार की बात प्रजापति दक्षया ने यज्य करवाया और उस यज्ञ में उन्होंने सभी देवताओं को आमंत्रित किया किंतु भगवान शिव को निमंत्रित नहीं किया। माँ सती यज्ञ में जाने को व्याकुल हो उठी तब शंकर भगवान् ने उनसे कहा कि सभी देवताओं को यज्ञ में आमंत्रित किया है परन्तु मुझे आमंत्रित नही किया गया है और यदि प्रजापति दक्ष ने मुझे आमंत्रित नहीं किया है तो मेरा वहां जाना उचित नहीं है। परन्तु माँ सती ने जिद की कि उन्हें यज्ञ में जाना और माँ सती का प्रबल आग्रह देख कर शंकर भगवान ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी।

माँ सती जब अपने घर गई तो केवल उनकी माँ ने ही उनसे प्रेम पूर्वक बात की, बाकि बहेनो ने उसने बात नहीं की उनकी बातों में व्यंग और उपहास के भाव थे. और सबने भगवन शंकर के लिए भी अपने मन म तिरस्कार का भाव रखा हुआ था। प्रजापति दश्य ने भी भगवन शंकर को बहुत बुरा भला कहा और प्रजापति दक्षया के भगवान् शिव को इतना सब कहने के बावजूद भी सभी देवगण शांत थे उन्होंने शिव जी के पाकस्य में कुछ नहीं कहा, इन् सब बातों से माता पार्वती को बड़ी ठेस पहुंची, माँ सती अपने पति का यह अपमान सहन नही कर सकी और यज्ञ की अग्नि में माँ पार्वती ने अपने आप को भस्म कर दिया इस दारुण दुःख से व्यथित होकर भगवन शिव ने उस यज्ञ को विध्वंस कर दिया। और यही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलाई। पार्वती और हेमवती भी इसी देवी क नाम हैं ।

About Versha Bhatt

Check Also

माँ कुष्मांडा

माता कूष्माण्डा की आरती

माता कूष्माण्डा की आरती कुष्मांडा जय जग सुखदानी मुझ पर दया करो महारानी पिंगला ज्वालामुखी …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *