Home / माँ दुर्गा जी के 9 रूप / नवमी शक्ति माँ सिद्धिदात्री1 min read

नवमी शक्ति माँ सिद्धिदात्री1 min read

नवमी शक्ति माँ सिद्धिदात्री

नवमी शक्ति माँ सिद्धिदात्री

सिद्ध गन्धर्व यज्ञद्यैर सुरैर मरैरपि |

सेव्यमाना सदा भूयात्‌ सिद्धिदा सिद्धि दायिनी ||

माता सिद्धिदात्री

माँ दुर्गा जी के नवमी शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं| नवरात्र पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है| इस दिन शास्त्रीय विधि विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है| देवी पुराण में उल्लेख है, की भगवन शिव ने इन् देवी की कृपा से सम्पूर्ण सिद्धियाँ प्राप्त की थी| माता सिद्धिदात्री की कृपा से ही शिव शंकर का आधा शरीर देवी का हुआ था जिसके पश्चात भगवान शंकर अर्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए|

माता का रूप

माता सिद्धिरात्रि का सम्बन्ध केतु ग्रह से है| इस दिन भक्तों का अपना सारा ध्यान निर्माण चक्र की ओर जो कि हमारे कपाल के मध्य स्थित होता है वहां लगाना चाहिए| इन देवी के दाहिने तरफ के नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा| बायीं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंक और ऊपर वाले हाथ में कमल का पुष्प है| इनका वाहन सिंह है| और माँ सिद्धिदात्री कमल के पुष्प पर भी आसीन रहती हैं|

माता की उपासना

विधि विधान से नवरात्र के नौवे दिन माता सिद्धिरात्रि की उपासना करने से सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं| इनकी उपासना करने से अलोकिक और पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है| नवरात्र के नौवे दिन भक्तों को माता सिद्धिदात्री को नौ प्रकार के प्रसाद नव रस युक्त भोजन नौ प्रकार के पुष्प और नौ प्रकार के  फल अर्पित करने चाहिए| इस प्रकार से की हुई पूजा द्वारा माँ अपने भक्तो से अत्यन्त प्रस्सन हो जाती हैं| तथा उन भक्तो को संसार में धर्म अर्थ मोक्ष और काम की प्राप्ति होती है| नवमी के दिन केवल माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने से ही सम्पूर्ण देवियों की पूजा का फल प्राप्त हो जाता है|

विधि

इस दिन कई तरह के सुगंधित फूल अर्पित करने से माँ प्रस्सन हो जाती हैं| नवमी के दिन देवी को शहद अर्पित करें और यह मंत्र का उच्चारण करें, मंत्र कुछ इस प्रकार है|

ॐ सिद्धिदात्रि देव्यै नमः

नवरात्र के नौवे दिन नवरात्री की पूर्णता के लिए हवन किया जाता है| नवमी के दिन पहले पूजा करें और फिर हवन करें| हवन की सामग्री में जौ और काला तिल मिलाएं| इसके पश्चात नौ कन्याओं को घर बुला कर पूजन करके भोग लगाना चाहिए| तथा ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए| माता सिद्धिदात्री की उपासना से भक्त का कठिन से कठिन कार्य भी सरलता पूर्वक सम्पूर्ण हो जाता है|

आठ सिद्धियां

हिमाचल के ननदा पर्वत पर उनका प्रसिद्ध तीर्थ है| मार्कण्डेय पुराण में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्व यह आठ सिद्धियां बताई गई हैं| इसलिए माँ सिद्धिदात्री की सच्चे मन से, विधि विधान के साथ  उपासना एवं आराधना करने से यह अष्ट सिद्धियां प्राप्त की जा सकती| नवमी के दिन माँ को विब्भिन प्रकार के भोग लगाएं जैसे हलवा पूरी चना खीर इत्यादि, उसके पश्चात उस भोग को देवी स्वरूपा कन्या एवं ब्राह्मणों को खिलाएं| उस भोग को गरीबों में वितरित करने से जीवन में हर प्रकार की सुख शांति मिलती है |

जीवन को धन्य करें|

उसके पश्चात हाथ में फूल रख कर कहना चाहिए हे माँ मैंने नौ दिन तक आपका पूजन किया, आपका व्रत  किया| हे माँ मैं आपको प्रणाम करती/करता हूँ, ऐसी मंगल कामना हमारे जीवन में हो आपके चरणों में हमारा प्रेम बना रहे | नव दुर्गा में सिद्धिदात्री अंतिम हैं| आइये माँ सिद्धिदात्री की आराधना कर माँ को प्रस्सन कर एवं सिद्धियां प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य करें|

माँ सिद्धिदात्री की पूजन और कथा से केवल संपूर्ण सिद्धियों की प्राप्ति ही नही होती अपितु सुख शांति की भी प्राप्ति होती है| मोक्ष को प्रदान करने वाली माँ सिद्धिदात्री, इनकी उपासना से यश कीर्ति मान सम्मान प्राप्त कर लेते हैं|

जानिए आयुर्वेद के विभ्भिन फायदे

15 powerful Home remedies for hair growth

For more updates visit AYURVEDA GYAN

About Deepika Bhatt

Check Also

माँ कुष्मांडा

माता कूष्माण्डा की आरती

माता कूष्माण्डा की आरती कुष्मांडा जय जग सुखदानी मुझ पर दया करो महारानी पिंगला ज्वालामुखी …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *