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तेनालीराम की बुद्धिमता1 min read

तेनालीराम की बुद्धिमता

तेनालीराम की बुद्धिमता के चर्चे विजयनगर में चारो ओर फैले हुए थे। एक दिन जब राजा का दरबार भरा हुआ था, तब एक व्यापारी दरबार में आया । उसके साथ लोहे का एक बड़ा संदूक था । उसने कहा मैं आपसे मदद मांगने आया हूँ । हे महराज! मैं एक व्यापारी हूँ। मैंने उत्तर भारत में तीर्थ यात्रा पर जाने की योजना बनाई है, मेरे पूर्वजों का सारा धन इस बक्से में है। मेरा आपसे अनुरोध है कि इसे अपनी सुरक्षित हिरासत में रखें । राजा ने कहा ठीक है, इस लोहे के बक्से को लेके मेरे पास आओ मैं इसको सुरक्षित रखूँगा। राजा ने व्यापारी से कहा, तुम्हारी यात्रा शुभ हो । राजा ने मंत्री से कहा इस बक्से को राज खजाने में रखो । इसपर मंत्री बोले, हे महराज! कानून कहता है की, राज खजाने में केवल राज भंडार ही रह सकता है । इसलिये आप इसे अपने भरोसेमंद तेनालीराम को दे सकते हैं, ताकि ये अपने घर में इस बक्से को सुरक्षित रखे । राजा ने हामी भरते हुए कहा, तेनालीराम क्या तुम इसे रखोगे? इसपर तेनालीराम बोले जैसा आप कहें महाराज और मंत्री ने बक्सा तेनालीराम को दे दिया । तेनालीराम भी बक्से को लेकर अपने घर की तरफ चले गए ।

कुछ महीनो बाद व्यापारी दुबारा राजदरबार में आया और उसने कहा, महाराज में तीर्थ यात्रा करके वापस आ गया हूँ । मेरी यात्रा सफल रही। मैं यह दुबारा इसलिए आया हूँ ताकि में मेरे द्वारा दिया गया बक्सा वापस ले सकूँ । महाराज राजा बोले, तेनालीराम बक्स ला कर उन्हें वापस दे । दो तेनालीराम ने कहा, जी महाराज और वे बक्सा लेने के लिए वापस घर गए । जब घर पहुँच कर उन्होंने लोहे का बक्सा उठाया तो उन्हें आश्चर्य हुआ । क्योकि बक्से का वजन पहले से बहुत कम हो गया था । तेनाली समझ गये कि व्यापारी राजा को धोखा देने आया था ।
तेनाली ने कुछ समय तक बक्से को बहुत ध्यान से देखा फिर वो जल्दी से राजा के दरबार में पहुँचे और उन्होंने राजा से कहा, महाराज इस व्यापारी के पूर्वज मेरे घर में आये हैं और वो मुझे वो बक्सा यहां पर नहीं लाने दे रहे महाराज । व्यापारी को गुस्सा आ गया और उसने तेनालीराम को गुस्से से कहा कि, ए ढ़ोंगी चालकी मत कर । व्यापारी राजा से बोला, हे महाराज! तेनाली चालाकी से मेरा सारा धन हड़पना चाहता है ये हम सबको धोखा देना चाहता है । इसपर महाराज बोले तेनाली हम सब अभी तुम्हारे घर आएंगे अगर तुम गलत साबित हुए तो तुम्हें कठोर दंड मिलेगा । तेनाली बोले जी महाराज!

तो राजा दरबारी और व्यापारी सभी तेनाली के घर पहुँच गये । राजा ने देखा कि बक्से में चीटियां लगी थीं । राजा ने तेनाली को बक्सा खोलने का आदेश दिया, बक्से खुलते ही व्यापारी की सच्चाई सामने आ गयी राजा बोले यह क्या इसमें तो चीटियां हैं । क्या यही है तुम्हारे पूर्वजों का धन? राजा ने आदेश दिया की मुझे धोखा देने के जुर्म में इस व्यापारी को बंधी बना लिया जाए । तभी व्यापारी बोला, माफ़ कीजिये महाराज मुझे इन दोनों मंत्रियों ने ये खेल खेलने को कहा था ताकि तेनाली को सजा मिले । राजा ने दोनों मंत्रियों को भी बंदी बनाने का आदेश दिया । राजा तेनाली की बुद्धिमता को देख के आशर्यचकित हुए, और उन्होंने तेनालीराम से पूछा कि, तेनाली तुम बताओ की तुम्हे कैसे पता लगा की इस बक्से में सिर्फ शक्कर है? महाराज का प्रश्न सुन के तेनालीराम मुस्कुराते हुए बोले, महाराज उस बक्से के आस पास सिर्फ चीटियां ही मंडराती रहती थीं अगर इसमें कोई बहुमूल्य वस्तु होती या कोई रत्न होते तो चीटियां वह नहीं जाती, साथ ही जैसे जैसे चीटियों ने शक़्कर कहानी शुरू करी, बक्से का वजन कम होता गया इसी बात को साबित करने के लिए मैंने चीटियों को उसका पूर्वज कहा। राजा तेनाली की बात सुन हैरान हुए और उन्होंने कहा तेनाली में तुम्हारी बुद्धि से आश्चर्यचकित हूँ, मेरी तरफ से ये मोतियों की माला स्वीकार करो। तेनाली ने महाराज को धन्यवाद कहा।

 

 

 

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