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जगत जननी माँ महागौरी1 min read

जगत जननी माँ महागौरी

आठवीं शक्ति: जगत जननी माँ महागौरी

नवरात्र के आठवें दिन जगत जननी महागौरी माता का ध्यान करते हैं| उनके चरणो के शुभ आशीष से अपने सारे कलेश धो कर अपने जीवन को पाप मुक्त करते हैं| माता महागौरी आदिशक्ति हैं| इनके तेज से सम्पूर्ण विश्व प्रकाशमान होता है| देवी महागौरी की आराधना से सभी भक्तो के कष्ट दूर होते हैं| महागौरी देवी करुणामयी, कल्याणमयी, स्नेहमयी और शांत हैं| देवी के इस रूप की प्रार्थना करते हुए ऋषि गण  इस मंत्र का उच्चारण करते है|

सर्वमांगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके |

शरण्ये त्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ||

देवी पार्वती के इस रूप से भगवान शिव ने प्रस्सन होकर उन्हें आशीर्वाद दिया था| देवी ने जब शिव को प्राप्त करने के कठोर तपस्या की थी जिसके कारण उनका शरीर धक् गया तो भगवन शिव ने प्रस्सन होकर उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया| माता महागौरी सदैव कामनाओं को पूर्ण करने वाली, संगीत एवं गायन से शीघ्र प्रस्सन होने वाली देवी हैं| मैया की पूजा अर्चना करने से, उनका मंत्र उच्चारण करने से उनका श्रद्धा पूर्वक पाठ करने से, सच्चे मन से प्रार्थना करते हुए माँ स्वरुप पृथ्वी पर आयी कन्याओं का पूजन करने से माँ प्रस्सन होती हैं| नवरात्र की आठवें दिन कन्याओं का पूजन किया जाता है| उन्हें माता स्वरुप मान कर वस्त्र आदि भी भेंट किये जातें है| आइये जगत जननी माता महागौरी का मंत्र जाप करते है|

या देवी सर्वभूतेषु गौरि रूपेण संस्थिता|

नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमः||

माँ गौरी शांति स्वरूप है, अद्भुत गौर वर्ण वाली है| माँ धन वैभव सुख शान्ति की अधिष्ठात्री देवी है| अष्टमी के दिन श्वेत रंग में इनका ध्यान लाभकारी हो सकता है| विवाह सम्बंधित बाधाओं में भी इनका उपाय अचूक है| ज्योतिष शास्त्र में इनका संबंध शुक्र ग्रह से है| आर्थिक समस्या और मन चाहे विवाह के लिए भी माँ गौरी की उपासना की जाती है| जगत जननी माता की कथा कीऔर बढ़ने से पहले हम माता गौरी को स्मरण करेंगे|

जगत जननी महागौरी माँ के, चरणो को नित ध्याइये|

कृपा मिलेगी जगदम्बे की पापों से मुक्ति पाइए||

इनका वर्ण पूर्णतः गौर है, इसलिए यह महागौरी कहलाती हैं| चार बुझा धारी माता महागौरी का पूजन करने से विवाहित स्त्रियों के सुहाग की रक्षा होती है| कुंवारी कन्याओं को योग्य वर प्राप्त होते हैं| एवं पुरुषों का जीवन सुखमय रहता है| माता महागौरी पापों को नष्ट करती हैं और अंतर आत्मा को शुद्ध करती हैं| माँ अपने भक्तों को अक्षय आनंद और तेज प्रदान करती हैं|

माता महागौरी की कथा

माता महागौरी की कथा को ध्यान पूर्वक और सम्पूर्ण भक्ति क साथ सुनना चाहिए| जगत जननी माता महागौरी की कथा कुछ इस प्रकार है| देवी पार्वती के रूप में इन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी| एक बार भगवन भोले नाथ ने देवी पार्वती को कुछ कह दिया जिससे देवी का मन आहत हो गया| उसके पश्चात माता पार्वती तपस्या में लीन हो गयी| जिस जंगल में माता पार्वती तपस्या में लीन थी उसी जंगल में एक सिंह बहुत भूखा था और भोजन की तलाश में वो देवी पार्वती के पास पहुंचा| देवी को देख कर सिंह की भूख बढ़ गयी किन्तु वह देवी की तपस्या से उठने की प्रतीक्षा में वहीं बैठा|

माता की तपस्या 

माता ने कई वर्षो तक कठोर तपस्या की जिसके कारण वो सिंह बहुत कमजोर हो गया| जब काफी समय तक माता वापस नहीं लौटी तोह भगवन भोले नाथ उनके पास पहुंचे| वहां पर माँ पार्वती का स्वरूप देख कर वे अत्यन्त आश्चर्यचकित हो| उनकी छटा चांदनी के सामन श्वेत और कुन्द के फूल के समान धवल दिखाई पड़ती थी| महागौरी के वस्त्र और आभूषण से प्रस्सन होकर भगवन शिव ने माँ पार्वती को गौरवर्ण का वरदान दिया|

सिंह की तपस्या

माँ ने अपनी नेत्र खोले, जब वे तपस्या से उठी तो सिंह की दशा देख कर उन्हें उस पर बहुत दया आई और माँ ने उसे अपनी सवारी बना लिया| क्यों कि देखा जाये तो एक प्रकार से सिंह ने भी तपस्या की थी माता महागौरी के साथ इसलिए उसे भी उसकी तपस्या का फल प्राप्त हुआ|

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