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काशी विश्वनाथ मंदिर1 min read

काशी विश्वनाथ मंदिर

पुराणों के अनुसार जब भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा में इस बात को लेकर विवाद हुआ की कौन सबसे सर्वोच्च है तो भगवान शिव ने तीनो लोकों को एक जोय्ति के अनंतहीन स्तंभ से भेद दिया था और बोले की ”जो भी इस स्तंभ का आखिरी छोर ढूंढ़ लेगा वही सर्वोच्च माना जाएगा”। कुछ समय पश्च्यात जब कोई परिणाम नहीं मिला तो विष्णु जी ने अपनी हार मान ली परंतु ब्रह्मा जी ने यह बोला की उन्हें अंतिम छोर मिल चुका है। यह सुन कर भगवान शिव दूसरे स्तंभ से प्रकट हुए और ब्रह्मा जी को यह श्राप दिया की वह कभी पूजे नहीं जाएंगे और विष्णु जी की पूजा अनंतकाल तक की जाएगी।

उन्ही जोय्ति स्तंभो को जोय्तिर्लिंग कहा गया है।

वैसे तो देवों के देव महादेव के कई मंदिर प्रसिद्ध है। पर खास मान्यता १२(12) जोय्तिर्लिंगो को दी गयी है, जिसमे सोमनाथ जोय्तिर्लिंग, मल्लिकार्जुन जोय्तिर्लिंग, महाकालेश्वर जोय्तिर्लिंग, ओंकारेश्वर जोय्तिर्लिंग, केदारनाथ जोय्तिर्लिंग, भीमाशंकर जोय्तिर्लिंग, कशी विश्वनाथ, त्रिम्बकेश्वर जोय्तिर्लिंग, बैद्यनाथ जोय्तिर्लिंग, नागेश्वर जोय्तिर्लिंग, रामनाथस्वामी/रामेश्वर जोय्तिर्लिंग और घृष्णेश्वर जोय्तिर्लिंग शामिल हैं।

आज हम इन्ही में से एक प्राचीन और प्रसिद्ध जोय्तिर्लिंग; काशी विश्वनाथ मंदिर के बारे जानेंगे।

हिन्दू मान्यता के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है भगवान शिव का काशी विश्वनाथ मंदिर। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पश्चिमी गंगा घाट के पास स्तिथ इस मंदिर का दृश्य अतभुद है।

इस मंदिर में पूजे जाने वाले जोय्तिर्लिंग को विश्वनाथ या विश्वेशरा कहा जाता है। जिसका अर्थ है ”ब्रह्माण्ड का शासक”।

काशी विश्वनाथ मंदिर के पास गंगा घाट जिसका नाम मणिकर्णिका है, उसे शक्ति पीठ की मान्यता दी गयी है।

काशी-विश्वनाथ-मंदिर-मणिकर्णिका-घाटमणिकर्णिका घाट

मंदिर की विशेषताएं:

काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा जाने वाला लिंग/शिवलिंग ६० स्म (60cm)लम्बा और ९० स्म (90cm )चौड़ा है और चंडी की वेदी में स्थापित है। मुख्य मंदिर के चारों ओर अन्य देवी देवता जैसे; कालभैरव, विष्णु और अविमुक्तेश्वरा के मंदिर बने हुए है। यह मंदिर तीन भागों का सम्मेलन करके बना है ; पहला भाग एक शिखर है , दूसरा भाग एक सोने का गुम्मद है और तीसरा गर्भ गृह में स्थापित शिवलिंग के पास त्रिशूल और झंडा है। मंदिर के कुँए (ज्ञान वापी) के बारे में यह कहा जाता है की जब मंदिर पर आक्रमण हुआ तो पुजारी ने शिवलिंग को सुरक्षित रखने के लिए शिवलिंग समेत इसी कुँए में छलांग लगाई थी। मंदिर में होने वाली चारों पहर की आरतियां बहुत ही मनमोहक, दिव्य और दर्शनीय होती है।

काशी-विश्वनाथ-मंदिर-गंगा-आरतीगंगा आरती

मंदिर की मान्यता:

हिन्दू पुराणों के अनुसार शिव को विनाशक कहा गया है। काशी विश्वनाथ मंदिर के ज्योतिर्लिंग विश्वेशरा की बहुत मान्यता है। यहा आने वाले हज़ारों श्रद्धालु मानते है की काशी धाम में भगवान शिव के विश्वनाथ मंदिर के दर्शन कर के एवं गंगा में डुबकी लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है की यह आने वाले श्रद्धालु अपनी यात्रा पूर्ण होने के बाद अपनी किसी एक इच्छा का त्याग करते है। कई कहानियों में इस बात का भी वर्णन है की शिव की पूजा करने वाले भक्त जब इस संसार से मुक्त हो जाते है तब स्वयं शिव के दूत उन्हें कैलाश ले कर जाते है जो शिव का निवास है। इस मंदिर से जुड़ी एक कहानी में कहा गया है की विश्वनाथ मंदिर में शिव स्वयं ही मोक्ष का मंत्र मरने वाले लोगो के कान में डालते है।

काशी-विश्वनाथ-मंदिर-शिवलिंगकाशी विश्वनाथ शिवलिंग

काशी विश्वनाथ मंदिर कैसे जाएं?

काशी विश्वनाथ मंदिर जाने के लिए रेलगाड़ी का प्रयोग किया जा सकता है। वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन मंदिर से केवल २ किलोमीटर (2km) की दुरी पर है।वाराणसी जंक्शन ६ किलोमीटर (6km) और मुग़ल सराय १७ किलोमीटर (17km) की दुरी पर है।

काशी जाने के लिए कई बस यात्रा भी की जा सकती है।

अगरआप समय की बचत करना चाहते है तो हवाई यात्रा का लाभ उठा सकते है। बाबतपुर में लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा २० से २५ किलोमीटर (20से25km) दूर है। हवाई अड्डे से मंदिर जाने के लिए रिक्शा और टैक्सी की सुविधा उपलभ्द है।

हर साल लाखों श्रद्धालु काशी यात्रा पर जाते है, और ज्ञानी लोगो का कहना है की हर व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार काशी जाना ही चाहिए।

 

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