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अकबर बीरबल और असली बादशाह1 min read

अकबर बीरबल और असली बादशाह

बीरबल बादशाह अकबर के दरबार के सबसे चतुर वह होशियार नवरत्न थे। वे समय समय पर अपनी होशियारी का नमूना पेश करते रहते थे। एक बार की बात है, बादशाह अकबर और बीरबल पासों का खेल खेल रहे थे। तभी उनका सिपाही आया और बोला जहांपना यूनान से एक राजदूत आया है और वह आपसे मिलना चाहता है। अकबर बोले उन्हें दरबार में बुलाओ। राजदूत अंदर आया और बोला बादशाह सलामत रहे। बादशाह मुस्कुराये, और फिर राजदूत बोले महाराज यूनान के राजा ने आपके लिए एक सन्देश भेजा है। उसने फिर संदेश पढ़ना शुरू किया।

जिसमें लिखा था, ‘बादशाह सलामत हमें मालूम है की आपके दरबार में कई काबिल व्यक्ति हैं। परन्तु जिसके बारे में हमने सबसे जायदा सुना है वह हैं, बीरबल! खासकर उनकी सूझ बूझ और हाज़िर जवाबी। मैं आपका एहसान मंद रहूँगा अगर आप उन्हें शाही दौरे में यूनान भेज कर हमें भी उनसे रूबरू होने का मौका दें’। कुछ देर सोचने के बाद अकबर बोले बीरबल तुम्हें जाना चाहिए। यह सुन कर राजदूत वह से चला गया।

अकबर बीरबल को आगाह करते हुए बोले बीरबल ख़बरदार! यह सिर्फ एक दावत नहीं है। यूनान के बादशाह बहुत चालाक हैं। उन्हें लोगों को नीचा दिखाने और बेइज़्ज़त करने में बहुत मज़ा आता है। हमें इस बात की चिंता रहेगी की कही सब के सामने हमारे दरबार के सबसे काबिल आदमी की नाक न कट जाए।  बीरबल इस बात पर हसने लगे और बोले आप चिंता न करें जहांपना मैं उनको ऐसा कोई मौका ही नहीं दूंगा की वो मुझे नीचा दिखा सकें या बेइज़्ज़त कर सकें। मैं किसी भी हाल में आपकी शान में आंच नहीं आने दूंगा।

अगले ही दिन बीरबल यूनान के लिए निकल पड़े। जैसे ही वे दरबार में पहुँचे वे आश्चर्यचकित हो गए उन्होंने देखा की ऊपर सात गाड़ियां लगी हुई हैं और उसमे एक जैसी शक्ल वाले लोग बैठे हुए हैं उन्हें कुछ समझ नहीं आया की इनसे में असली बादशाह कौन है? उन्होंने कहा यह क्या है? सात एक जैसे दिखने वाले लोग! बीरबल सोच में पढ़ गये। काफी देर तक उनको देखते रहे पर उन्हें कोई भी सुराग नहीं मिल रहा था जिससे की वे यह पता लगा सकें कि असली बादशाह कौन है।

बादशाह

उन्हें बादशाह अकबर को दिया हुआ वचन याद आ रहा था। उन्होंने सोचा कि अगर मैंने सही जवाब नहीं दिया तो मेरा दिया हुआ वचन टूट जायेगा और बादशाह अकबर शर्मिंदा होंगे। बीरबल एक बार फिर तख़्त पर बैठे सभी व्यक्तियों को देखने लगे और अनुमान लगाने लगे कि कौन असली बादशाह है।

इतने में अचानक से एक मख्खी दरबार में आ गई। वह मख्खी धीरे – धीरे सभी के पास से होते हुए गुजरी। जिसके भी पास से वह मख्खी गुजरती वह इधर – उधर देखने लगता। जैसे ही वह मक्खी बादशाह के गाल पर बैठी बादशाह ने उसको मारने के लिए गाल पर तेज़ी से हाथ मारा तो वह बैठे सभी व्यक्तियों में अपने गाल पर हाथ मार लिया। यह देख बीरबल तुरंत बोले आप ही हैं असली बादशाह। बादशाह बोले हाँ बीरबल तुमने सही पहचाना।

हम मुतासिर हुए! लेकिन तुम्हें कैसे पता लगा की हम ही असली बादशाह हैं? बीरबल बोले महाराज आप जैसे दिखने वाले बादशाह आपके जैसा बनने की कोशिश कर रहे थे। वे बार बार आपको देख कर आपकी नक़ल कर रहे थे। आपके हमशक्ल तख़्त पर बेचैन बैठे हुए थे, लेकिन आप बहुत शांति और शान से बैठे हुए थे। बादशाह खुश हुए और बोले बीरबल तुम सच में बेशकीमती हीरे हो। तुम्हारी बुद्धि देख कर हम प्रसन्न हुए।

लेकिन क्या तुम बता सकते हो दिल्ली की सड़कों में कितने मोड़ हैं? बीरबल ने उत्तर दिया हुज़ूर दो ही मोढ़ हैं, एक बायां एक दायां। यह सुन सभी दरबारी ठहाका मार कर हसने लगे। फिर सुलतान ने एक और प्रश्न पूछा बीरबल बताओ इंसान ज़ायदा खुश कैसे रह सकता है? बीरबल बोले अपनी ख़ुशी दूसरों के साथ बाँट के। वह क्या चीज़ है जो ख़त्म नहीं होती? बीरबल बोले वह नाम जो दुसरो की मदद कर के कमाया गया हो।

यह जवाब सुन कर सभी दरबारी बीरबल की तारीफ़ करने लगे। बादशाह बोले बीरबल हमने आज तक सिर्फ तुम्हारी चतुराई के किस्से ही सुने थे पर आज देख भी लिया। हम बादशाह अकबर का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने हमारी ख्वाहिश कबूल की और तुम्हें यहाँ भेजा। अंत में बीरबल बादशाह की इज़ाज़त लेकर वापस लौट आये।

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